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क्या दिल्ली की इन जगहों पर घूमे हैं आप, जहां जुड़ा है इतिहास

  |  Updated On : December 01, 2017 10:33 AM
फाइल फोटो

फाइल फोटो

मुंबई:  

दिल्ली भारत की राजधानी ही नहीं पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र भी है। यहां मंदिरों से लेकर मॉल तक, किलों से लेकर उद्यान और अनेक ऐतिहासिक इमारतें और हैं, जो इतिहास की जीवंत निशानियां हैं।

हम आपको आज दिल्ली की ऐसी जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आप अगर नहीं गए हैं तो अब जरूर जाएं...

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कुतुब मीनार (फाइल फोटो)

कुतुब मीनार (फाइल फोटो)

कुतुब मीनार 120 मीटर ऊंची है। मोहाली की फतेह बुर्ज के बाद यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी मीनार है। यह मीनार लाल पत्थर और मार्बल से बनी है। इसके अंदर कुल 379 सीढ़ियां हैं। कुतुब-उद-दिन ऐबक ने 1220 में इसका निर्माण शुरू किया था। 1369 में अचानक इसकी एक मंजिल गिर गई। फिर फिरोज शाह तुगलक ने इसका पुर्ननिर्माण शुरू किया। वह हर साल 2 नई मंजिल बनवाते थे। खास बात यह है कि यह कई ऐतिहासिक धरोहरों से घिरा हुआ है। इनमें कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, अलाई दरवाजा, अलाई मीनार और आयरन पिलर जैसे इमारतें शामिल हैं।

लाल किला (फाइल फोटो)

लाल किला (फाइल फोटो)

दिल्ली में स्थित लाल किला भारत की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहर है। मुगल बादशाह शाहजहां ने 1638 ईसवी में लाल किले का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। करीब 10 साल बाद यह बनकर तैयार हुआ था। लालकिला, शाहजहां की नई राजधानी शाहजहांनाबाद का महल था। शाहजहांनाबाद तत्कालीन दिल्ली शहर की सातवीं मुस्लिम नगरी थी। शाहजहां ने अपनी राजधानी को आगरा से बदलकर दिल्ली बना लिया था। 1783 में सिक्खों ने लालकिले के अंदर बने दीवान-ए-आम पर कब्जा कर लिया था। ब्रिटिश काल में (1857) के बाद इस किले की बनावट में अंग्रेजों ने कई बदलाव किए थे। लाल बलुआ पत्थर की प्राचीर और ऊंची दीवारों के कारण इसका चयन यूनेस्को की विश्व धरोहर में किया गया है।

हुमायूं का मकबरा (फाइल फोटो)

हुमायूं का मकबरा (फाइल फोटो)

यह मुगल शासक हुमायूं का मकबरा है। भारतीय उपमहाद्वीप का यह पहला गार्डन मकबरा है। इस मकबरे के अंदर छोटे-छोटे स्मारक भी बने हुए हैं। 1556 में हुमायूं की मृत्यु के बाद मकबरे की देखरेख मुगल शासक अकबर ने की। ऐसा कहा जाता है कि मकबरे में हुमायूं का शरीर दो अलग-अलग जगहों पर दफनाया गया है। साथ ही यहां करीब 150 कब्र हैं, जो गार्डन से घिरी हुई है।

अग्रसेन की बावली (फाइल फोटो)

अग्रसेन की बावली (फाइल फोटो)

कनॉट प्लेस में स्थित अग्रसेन की बावली ऐसे स्मारकों में से है, जिसका रहस्य अभी भी बरकरार है। यह बावली करीब 60 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊंचा सीढ़ीनुमा कुआं है। इस बावली में करीब 105 सीढ़ियां हैं। ऐसा दावा किया जाता है कि महाभारत काल में ही इसका निर्माण कराया गया था। यह भी कहा जाता है कि इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में शौर्य वंश के महाराजा अग्रसेन ने कराया था। यह बावली डरावनी कही जाती है, क्योंकि किसी जमाने में यहां काला पानी होने का दावा किया गया है। काला पानी यहां आए उदास और दुखी लोगों को अपनी ओर सम्मोहित कर अंदर कूदने पर मजबूर कर देता था। हालांकि आज के समय में यह कुआं पूरी तरह सूख चुका है। यह अफवाह है या सच्चाई, आज तक साबित नहीं हो सका है।

इंडिया गेट (फाइल फोटो)

इंडिया गेट (फाइल फोटो)

शहीदों को समर्पित इंडिया गेट उन लोगों की याद में बना है, जिन्होंने देश के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया था। यह स्मारक नई दिल्ली में राजपथ मार्ग पर स्थित है, जो भारत की विरासत के रूप में जाना जाता है। इंडिया गेट एड्विन लैंडसियर लूट्यन्स द्वारा डिजाइन किया गया था। इसका निर्माण 1931 में पूरा हुआ था। शुरूआत में इस स्मारक का नाम 'ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल' रखा गया था। इंडिया गेट का निर्माण लाल बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट से किया गया है। इंडिया गेट की ऊंचाई 42 मीटर है।

अक्षरधाम मंदिर (फाइल फोटो)

अक्षरधाम मंदिर (फाइल फोटो)

अक्षरधाम मंदिर को स्वामीनारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह विश्व के विशालकाय मंदिरों में से एक है। इसका विशाल आर्किटेक्चर इतिहास को बयां करता है। करीब 11,000 कलाकारों और अनगिनत सहयोगियों ने मिलकर इसका निर्माण किया था। नवंबर 2005 में इस मंदिर की स्थापना की गई थी।

जंतर मंतर (फाइल फोटो)

जंतर मंतर (फाइल फोटो)

जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा बनवाए गए पांच वेधशालाओं में दिल्ली का जंतर मंतर एक है। इस स्मारक में 13 वास्तु खगोल विज्ञान उपकरणों का समूह है। मोहम्मद शाह के शासन काल के दौरान हिंदू और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों के मध्य ग्रहों की स्थिति के विषय में बहस छिड़ गई थी, जिसे मिटाने के लिए सवाई राजा जय सिंह ने इसका निर्माण 1724 में कराया था।

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