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संघर्ष में बीता स्टीव जॉब्स का बचपन, लेकिन हासिल किया अलग मुकाम

Updated On : Sep 13, 2017 11:02 AM

स्टीव जॉब्स (फाइल फोटो)

स्टीव जॉब्स (फाइल फोटो)

एप्पल कंपनी ने iPhone-8 लॉन्च कर दिया है। कंपनी की तरफ से अब तक जितने आईफोन लॉन्च किए गिए हैं, उन्हें लोगों ने काफी पसंद किया है। यह कंपनी के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। लेकिन सफलता के पीछे एक शख्स का बहुत बड़ा हाथ है। जी हां, ये शख्स और कोई नहीं स्टीव जॉब्स हैं। उन्हें अमेरिका के जानेमाने उद्योगपतियों में गिना जाता है।

स्टीव जॉब्स (फाइल फोटो)

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स्टीव जॉब्स का बचपन काफी संघर्ष में बीता। कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी एपल के भूतपूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स को पाउल और कालरा जॉब्स ने उनकी मां से गोद लिया था। स्टीव के पास पढ़ने तक के लिए पैसे नहीं थे। खुद का खर्चा उठाने के लिए उन्हें छोटी सी उम्र में ही नौकरी करनी पड़ी। बोतले बेचकर पैसे कमाने पड़े तो मंदिर में मिलने वाला मुफ्त भोजन भी किया।

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साल 1973 में स्टीव जॉब्स ने टेक्नीशियन के तौर पर काम करना शुरू किया। साल 1976 में उन्होंने वोजनियाक के साथ मिलकर व्यवसाय का गठन किया, जिसका नाम 'एपल कंप्यूटर कंपनी' रखा। धीरे-धीरे इस कंपनी ने मार्केट में नाम कमाना शुरू कर दिया था।

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हालांकि एपल से इस्तीफा देने के बाद स्टीव ने 1985 में नेक्स्ट इंक की स्थापना की। लेकिन 1996 में एपल की बाजार में हालत बिगड़ने पर स्टीव ने कंपनी में बतौर चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर ज्वॉइन किया। फिर एक साल बाद बतौर सीईओ करने लगे।

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साल 2001 में एपल ने आई पॉड का निर्माण किया। फिर आई ट्यून्ज बनाया गया। साल 2007 में आई फोन नाम से मोबाइल बनाया, जो आज बेहद सफल हैं। साल 2011 में स्टीव ने सीईओ के पद से इस्तीफा दे दिया। स्टीव को साल 2003 में पैनक्रियाटिक कैंसर हुआ था। बीमारी का ठीक से इलाज नहीं कराया गया, जिस वजह से साल 2011 में कैलिफोर्निया के घर में उनका निधन हो गया। उन्होंने अपने इंटरव्यू में कई ऐसी बातें बोली थी, जिसे उद्योगजगत में आज भी प्रेरणा के तौर पर लिया जाता है।

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स्टीव जॉब्स ने कहा था कि सफलता मनाना अच्छी बात है, लेकिन असफलताओं से सीख लेना उससे भी ज्यादा जरूरी है। उन्होंने एक बात और कही थी कि बहुत से काम करने से कहीं अच्छा होता है कि एक काम को बेहतरीन तरीके से किया जाए। 'ज्यादा' से 'अच्छा' बेहतर होता है।

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