लॉ एंड ऑर्डर और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण झारखंड में नहीं टिकते निवेशक: सीएजी

  |  Updated On : August 13, 2017 08:21 PM

नई दिल्ली:  

झारखंड ने साल 2001 से 2016 के बीच 3.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन उसका 'महज 3.8 फीसदी ही हकीकत में तब्दील हुआ'। इस नाकामी के कई कारण हैं, जिसमें कानून-व्यवस्था की कमी, बिजली और पानी कनेक्शन की कमी प्रमुख है। ऐसा कैग की रिपोर्ट में कहा गया है।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने शनिवार को झारखंड विधानसभा के पटल पर रखी अपनी रिपोर्ट में कहा, 'इस्पात क्षेत्र में कुल 1.60 लाख करोड़ रुपये का निवेश राज्य में नहीं हो सका, क्योंकि उन्हें बिजली, पानी मुहैया नहीं करवाया गया, साथ ही कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति भी एक बड़ी समस्या है।'

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, 'झारखंड व्यापार करने में आसानी के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है, लेकिन औद्योगिकीकरण की जमीनी हकीकत से इसका कोई संबंध नहीं है।'

रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड की स्थिति ओडिशा और छत्तीसगढ़ से भी बुरी है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में एक भी एमओयू रद्द नहीं हुआ है, लेकिन झारखंड में 79 एमओयू में से 38 रद्द हो चुके हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन एमओयू के रद्द होने का मुख्य कारण सिंगल विंडो सिस्टम की कमी है, राज्य सरकार में इच्छाशक्ति की कमी और नक्सलवाद से संबंधित घटनाएं हैं।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के 24 में से 22 जिले नक्सलवाद से प्रभावित है।

इसे भी पढ़ें: बीआरडी अस्पताल की घटना के बाद केजरीवाल भी हुए अलर्ट

RELATED TAG: Cag,

देश, दुनिया की हर बड़ी ख़बर अब आपके मोबाइल पर, डाउनलोड करें न्यूज़ स्टेट एप IOS ओर Android यूज़र्स इस लिंक पर क्लिक करें।

Latest Hindi News से जुड़े, अन्य अपडेट के लिए हमें फेसबुक पेज, ट्विटर और गूगल प्लस पर फॉलो करें

न्यूज़ फीचर

मुख्य ख़बरे

वीडियो

फोटो