हिंदी मीडियम मूवी रिव्यू: इरफान खान की दमदार एक्टिंग दर्शकों को नहीं होने देगी बोर

By   |  Updated On : May 20, 2017 04:24 PM
हिंदी मीडियम का पोस्टर

हिंदी मीडियम का पोस्टर

रेटिंग
स्टार कास्ट
इरफान खान, सबा कमर, दीपक डोबरियाल और अमृता सिंह
डायरेक्टर
साकेत चौधरी
प्रोड्यूसर
भूषण कुमार, कृष्णन कुमार, दिनेश विजन
जॉनर
ड्रामा

नई दिल्ली:  

बॉलीवुड में कम ही कलाकार होते हैं, जो खुद को हर किरदार में ढालने का माद्दा रखते हैं। इरफान खान भी इंडस्ट्री में उन्हीं कलाकारों में शुमार किए जाते हैं, जो अपने अ​भिनय से फिल्म की कहानी में जान डाल देते हैं। 

डायरेक्टर साकेत चौधरी की फिल्म हिंदी मीडियम इस शुक्रवार को रिलीज हो गई है। फिल्म की सीधी-साधी कहानी में इरफान खान की बेजोड़ एक्टिंग नजर आ रही है। वहीं पाकिस्तानी एक्ट्रेस सबा कमर ने भी अपनी डेब्यू फिल्म में काफी बेहतरीन काम किया है।

हिंदी मीडियम हर उस इंसान की कहानी है जिसने हिंदी मीडियम बोर्ड से पढ़ाई की है। लेकिन वो अपने बच्चों को कॉन्वेंट स्कूल में इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई करवाना चाहता है, क्योंकि आज के इंग्लिश ना केवल 'स्टेटस' है, बल्कि एक 'सच्चाई' है।

दिल्ली में नर्सरी स्कूलों में दाखिला हर साल मीडिया में गूंजता है। चंद कॉन्वेंट स्कूलों की सीट्स के लिए किस तरह से डोनेशन, सिफारिश और कोटे का खेल होता है, फिल्म में यह बखूबी तरीके से पेश किया गया है।

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चांदनी चौक में साड़ी स्टोर चलाता है राज मल्होत्रा 

फिल्म की कहानी शुरू होती राज मल्होत्रा (इरफान खान), मीता (सबा कमर) और उनकी बेटी पीया से, जो दिल्ली में रहते हैं। राज मल्होत्रा चांदनी चौक में एक साड़ी का स्टोर चलाते हैं। अपने ग्राहकों को साड़ी बेचने के लिए वो खुद उन्हें साड़ी पहन-पहनकर भी दिखाते हैं।

पाकिस्तानी एक्ट्रेस सबा कमर के रोल में राज की वाइफ बनी मीता अपनी बेटी को कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाना चाहती है, क्योंकि कॉन्वेंट एजुकेशन उसके लिए जरूरत से ज्यादा 'स्टेटस का सिंबल' है।

राज दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़ा एक देसी इंसान है वो हिंदी में ही सोचता है और हिंदी में ही बोलता है। वहीं मीता अपनी बेटी पीया को कॉन्वेंट में भेजना चाहती है, ताकि वह उसे अपनी तरह फर्टारेदार इंग्लिश सीखा सके।

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कॉन्वेंट्स ने पढ़ाई के नाम पर सिस्टम का बाजारीकरण 

कहानी में कई ट्विस्ट और मोड़ आते हैं। एडमिशन के लिए परिवार किस तरह से चांदनी चौक से निकलकर वसंत विहार में शिफ्ट हो जाता है। कॉन्वेंट्स ने पढ़ाई के नाम पर किस तरह से अपने सिस्टम का बाजारीकरण कर लिया है और उसमें फिट होने के लिए बच्चे से पहले पैरेंट्स को कैसे इंटरव्यू की तैयारी करनी पड़ती है, उसे इस फिल्म में बड़े ही मजेदार तरीके से दिखाया गया है। इसकी तैयारी में इरफान और सबा की एक्टिंग लाजवाब है।

इरफान के फैंस के साथ सभी को यह फिल्म काफी पसंद आऐगी। वहीं फिल्म के गाने, बैकगाउंड म्यूजिक भी बेहद शानदार है।

इसके साथ ही 'तुन वेड्स मनु रिर्टन' में अपनी कॉमेडी से सबको दीवाना बना चुका दीपक डोबरियाल का जादू इस फिल्म में भी देखने को मिला है।

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