तीन तलाक पर शुक्रवार को केंद्र सरकार पेश करेगी विधेयक, सरकार बोली- मुस्लिम संगठनों से नहीं ली गई राय

  |  Updated On : December 21, 2017 10:35 AM
तीन तलाक बिल को आज संसद में किया जा सकता है पेश (फाइल फोटो-IANS)

तीन तलाक बिल को आज संसद में किया जा सकता है पेश (फाइल फोटो-IANS)

नई दिल्ली:  

केंद्र की मोदी सरकार के मुख्य एजेंडे में शामिल तीन तलाक खत्म करने से संबंधित बिल शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने इस बारे में सदन को आज जानकारी दी।

केंद्रीय कैबिनेट ने तीन तलाक को अपराध की श्रेणी में रखने के प्रावधान वाले बिल को 15 दिसंबर को मंजूरी दी थी।

खबरों के मुताबिक बिल को आसानी से पास कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर सदन में मौजूद रहने के लिए कहा है।

'मुस्लिम संगठनों से नहीं ली गई राय'

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि तीन तलाक के खिलाफ विधेयक तैयार करने में मुस्लिम संगठनों से कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि यह मुद्दा लैंगिक न्याय, लैंगिक समानता और महिलाओं की गरिमा की मानवीय अवधारणा से जुड़ा हुआ है, जिसमें आस्था और धर्म का कोई संबंध नहीं है।

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दरअसल, सरकार से प्रश्न पूछा गया था कि क्या उसने विधेयक का मसौदा तैयार करने में मुस्लिम संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया है? जिसपर सरकार ने यह जानकारी दी।

सदन में लिखित उत्तर में कानून मंत्री ने कहा, 'सरकार का मानना है कि यह मुद्दा लैंगिक न्याय, लैंगिक समानता और महिलाओं की गरिमा की मानवीय अवधारणा से जुड़ा हुआ है और इसका आस्था और धर्म से कोई संबंध नहीं है।'

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के रोक के बावजूद तीन तलाक दिये जाने संबंधी 66 मामले आए हैं। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 22 अगस्त को तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को असंवैधानिक करार दिया था।

जिसके बाद 15 दिसंबर को मुस्लिम महिला(विवाह संरक्षण अधिकार) विधेयक, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई। उन्होंने गुजरात चुनाव अभियान के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया था।

विधेयक में क्या हैं प्रावधान?

तीन तलाक को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाया गया है। जिसके तहत तीन वर्ष कारावास का प्रावधान है। अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति तीन तलाक का प्रयोग करता है तो उसपर जुर्माना भी लगाया जाएगा। इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ ने 'असंवैधानिक व मनमाना' बताया था। अदालत ने यह भी कहा था कि तीन तलाक इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।

विधेयक में तत्काल तलाक को संज्ञेय व गैर-जमानती अपराध बनाने के अलावा, पीड़ित महिलाओं को भरण पोषण की मांग करने का अधिकार दिया गया है।

सरकार का दावा है कि इसे तीन तलाक की पीड़िता की रक्षा और उन्हें सम्मान व सुरक्षा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

आपको बता दें कि अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने मंत्रिमंडल द्वारा तीन तलाक पर विधेयक को मंजूरी दिए जाने पर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है।

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