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सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश, कहा- पति के धर्म के आधार पर नहीं बदलता महिला का धर्म

  |  Updated On : December 08, 2017 08:52 AM

नई दिल्ली:  

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अंतरजातीय विवाह में कानून किसी महिला के धर्म को उसके पति के धर्म के साथ मिलाने के लिए बाध्य नहीं करता है।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने यह बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने यह बात हिन्दू धर्म में शादी करने वाली पारसी महिला को पिता के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के हक की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कही।

पांच जजों की पीठ एक कानूनी सवाल वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पूछा गया था कि क्या एक पारसी महिला हिंदू धर्म के व्यक्ति से शादी कर लेती है तो क्या वो अपनी धर्म की पहचान खो देती है।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा पीठ में जस्टिस एके सीकरी, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण शामिल थे।

हिन्दू धर्म में शादी करने वाली पारसी महिला को पिता के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के हक की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान बेंच ने गुजरात के वालसाड पारसी अंजुमन ट्रस्ट को विचार करने का सुझाव दिया है।

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कोर्ट ने कहा कि मानवीय आधार पर ट्रस्ट विचार करे। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट के वकील से कहा कि इस बारे में ट्रस्ट से निर्देश लेकर कोर्ट को अवगत कराएं। इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।

अब इस मामले में वालसाड पारसी ट्रस्ट कोर्ट को बताएगा कि याचिकाकर्ता महिला को पारसी मंदिर (फायर टेम्पल) में प्रवेश की इजाजत दी जा सकती है या नहीं और वो पिता के अंतिम संस्कार में हिस्सा ले सकती है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ट्रस्ट से कहा कि मानवीय दृष्टि से भी विचार करें और एक बेटी-पिता के भावनाओं पर विचार करें।

गुल रुख गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपने पिता के अंतिम संस्कार में भाग लेने की मांग की थी। गुल रुख ने अपनी याचिका में गुहार लगाई थी कि उसे अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत दी जाए।

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हिंदू धर्म में शादी करने से महिला को पारसी ट्रस्ट ने पिता के अंतिम संस्कार में भाग लेने की अनुमति नहीं दी थी। गुल रुख गुप्ता ने गुजरात हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें कोर्ट ने पारसी ट्रस्ट के हक में फैसला सुनाते हुए महिला को वंचित रखते हुए पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत नहीं दी थी।

धार्मिक अधिकार से वंचित होते हुए गुल रुख पारसी मंदिर में टॉवर ऑफ साइलेंस का हिस्सा नहीं बन पाई थी जहां शव को अंतिम गति के लिए रखा जाता है।

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