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क्या चुनाव आयोग को मिले पार्टियों के रजिस्ट्रेशन रद्द करने का भी अधिकार? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

  |   Reported By  :  Arvind Singh   |   Updated On : December 01, 2017 05:40 PM

ख़ास बातें
  •  SC सुनेगा EC को राजनीतिक पार्टियों को रद्द करने का अधिकार देने वाली याचिका 
  •  केंद्र सरकार ने इस मामले में मांगा जवाब, क्या दिया जाए अधिकार
  •  सजायाफ्ता लोगों को किसी पार्टी का पदाधिकारी बनने से रोकने की भी है मांग

नई दिल्ली:  

सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग को पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार देने पर दायर याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।

कोर्ट ने इस बारे में दायर याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। 

अभी चुनाव आयोग पार्टियों को रजिस्टर्ड तो करता है, लेकिन उनकी मान्यता रद्द करने का अधिकार उसे नहीं है।

सजायाफ्ता लोगों के पार्टी पदाधिकारी बनने पर रोक लगाने पर विचार नही

हालांकि बीजेपी नेता अश्विनि उपाध्याय की ओर से दायर याचिका में सजायाफ्ता लोगों को किसी पार्टी का पदाधिकारी बनने से रोकने की भी मांग की गई थी।

याचिका कर्ता की ओर से पेश हुए वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी, कि अगर किसी व्यक्ति को दोषी पाए जाने पर उसके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जा सकती है तो उसे राजनीतिक पार्टी में किसी पद पर बने रहना भी तर्क संगत नहीं है।

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याचिका में कई ऐसे राजनेताओं के नाम का ज़िक्र किया था, जिनके खिलाफ़ आपराधिक मुकदमा लंबित रहने के बावजूद वो पार्टी में ऊंचे पदों पर आसीन है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप किसी को किसी राजनैतिक पार्टी के जरिये अपने विचार रखने से कैसे रोक सकते है। 

चुनाव आयोग को स्वायत्त बनाने पर एजी से सलाह मांगी

इसके साथ ही चुनाव आयोग को स्वायत्त बनाने को लेकर दायर एक दूसरी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने एटॉर्नी जनरल से भी राय मांगी है।

यह याचिका भी बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि अभी चुनाव आयोग अपने खर्च के लिए सरकार पर निर्भर है। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, सीएजी की तरह उसके लिए भी अलग से व्यवस्था की जानी चाहिए।

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इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयुक्तों के पद को मुख्य चुनाव आयुक्त जैसा संरक्षण मिलना ज़रूरी है। अभी मुख्य चुनाव आयुक्त को यह अधिकार हासिल है कि वो चुनाव आयुक्तों को हटाने की सिफारिश कर सकते हैं। 

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