डबल मर्डर मामले में बलात्कारी गुरमीत की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी, CBI कोर्ट में सुनवाई जारी

  |  Updated On : September 16, 2017 11:03 AM
हत्या के मामले में घिरा गुरमीत सिंह (फाइल फोटो)

हत्या के मामले में घिरा गुरमीत सिंह (फाइल फोटो)

ख़ास बातें
  •  गुरमीत सिंह को रेप के दोष मिल चुकी है 20 साल की सजा, रोहतक जेल में बंद
  •  गुरमीत के खिलाफ पत्रकार छत्रपति और पूर्व डेरा सदस्य रंजीत सिंह की हत्या का मामला

नई दिल्ली :  

बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा पा चुके डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह के खिलाफ हत्या के मामले में शनिवार को पंचकूला के सीबीआई कोर्ट में सुनवाई है। गुरमीत अभी रोहतक के सुनारिया जेल में बंद है।

गुरमीत की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी क्योंकि प्रशासन किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहता। गुरमीत के खिलाफ यह मामला पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या से जुड़ा है।

इस सुनवाई को लेकर सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। पंचकुला के सेक्टर 1 स्थित अदालत परिसर एवं अन्य क्षेत्रों में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों और हरियाणा पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है।

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हत्या के दो मामले

गुरमीत के खिलाफ पहला मामला डेरे की प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रंजीत के मर्डर से जुड़ा हुआ है। डेरा प्रबंधन को शक था कि रंजीत ने साध्वी यौन शोषण की गुमनाम चिट्ठी अपनी बहन से ही लिखवाई थी।

10 जुलाई 2002 को रंजीत की हत्या हुई थी। पुलिस जांच से असंतुष्ट रंजीत के पिता ने बाद में जनवरी 2003 में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी।

गुरमीत ने कराई पत्रकार की हत्या?

साध्वियों से रेप का मामला सामने आने के बाद सिरसा के पत्रकार छत्रपति ने अपने सांध्य दैनिक 'पूरा सच' में इससे संबंधित खबर छापी थी। उन्होंने वह चिट्ठी भी छापी जिसे साध्वियों ने प्रधानमंत्री तक को लिखा था।

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इसके बाद कुछ लोगों द्वारा छत्रपति की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। छत्रपति को 24 अक्टूबर 2002 को पांच गोलियां मारी गई थी। बाद में 21 नवंबर 2002 को छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मृत्यु हो गई।

इसके बाद जनवरी 2003 में पत्रकार छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की। हाई कोर्ट ने पत्रकार छत्रपति और रंजीत हत्याकांड की सुनवाई एक साथ करते हुए 10 नवंबर 2003 को सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए।

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