केंद्र सरकार रोहिंग्या मुसलमानों पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में करेगी बदलाव

  |  Updated On : September 15, 2017 12:02 AM
रोहिंग्या मुस्लिम के समर्थन में प्रदर्शन (फाइल फोटो)

रोहिंग्या मुस्लिम के समर्थन में प्रदर्शन (फाइल फोटो)

ख़ास बातें
  •  भारत में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिम को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया
  •  केंद्र ने कहा, रोहिंग्या मुसलमानों को देश के व्यापक हित में वापस भेजा जाना चाहिए
  •  भारत में करीब 40,000 रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं

नई दिल्ली:  

रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया और कहा कि रोहिंग्या मुस्लिम देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। रोहिंग्या मुसलमानों को देश के व्यापक हित में वापस भेजा जाना चाहिए।

हालांकि केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे को होल्ड कर दिया है। अब कुछ अन्य बदलावों के साथ इसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

मौजूदा हलफनामे के अनुसार केंद्र ने कहा, 'गृह मंत्रालय के (फॉरेनर डिवीज़न) के मुताबिक ऐसे खुफिया इनपुट मिले है, जिनके मुताबिक कुछ रोहिंग्या मुस्लिम उग्रवाद में शामिल है और दिल्ली,जम्मू, हैदराबाद और मेवात में बहुत सक्रिय है।'

केंद्र ने कहा कि रोहिग्या शरणार्थियों के देश में बने रहना जहां पूरी तरीके से गैर कानूनी है, वही इनके देश में रहने पर ये सुरक्षा के लिए गम्भीर खतरा सबित होंगे।

केंद्र ने आगे कहा, 'रोहिग्या मुस्लिमों को भारत में रहने से देश के नागरिकों का पाकृतिक संसाधनों पर जो हक़ है, वो बुरी तरीके से प्रभावित होगा। जिनमें भारतीय नागरिकों के रोजगार, हाउस सब्सिडी, चिकित्सा, शिक्षा और अन्य अधिकार शामिल है।'

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केंद्र ने कहा, 'इनके पाकिस्तान, बांग्लादेश में सक्रिय ISIS और दूसरे आतंकी संगठनों से सम्बन्ध साबित हुए है, (जिन संगठनों का मकसद देश के संवेदनशील इलाकों में साम्प्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देना है) ऐसी स्थिति देश के हितों को गम्भीर नुकसान पहुंचा रही है।'

सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अब सोमवार को सुनवाई करेगा। आपको बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या मुस्लिम के मुद्दे पर केंद्र से जवाब मांगा था।

9 सितंबर को वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर भारत में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिम को जबरदस्ती म्यांमार भेजे जाने का विरोध किया था।

ह्यूमन राइट्स वॉच रिपोर्ट 2017 के अनुसार, म्यांमार में जून 2012 से जातीय सफाई अभियान जारी है, जिसके तहत रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ सबसे गंभीर और व्यापक हिंसा बरपाई जा रही है।

रिपोर्टो के अनुसार, भारत में करीब 40,000 रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं। जिसे भारत म्यांमार वापस भेजना चाहता है।

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