Breaking
  • पीएम नरेंद्र मोदी लंदन से जर्मनी पहुंचे, एंजेला मर्केल के साथ करेंगे डिनर
  • CBI ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पोक्सो कोर्ट में किया पेश, सात दिन की बढ़ाई कस्टडी
  • IPL 2018 CSK Vs RR: राजस्थान रॉयल्स ने जीता टॉस, गेंदबाजी का फैसला
  • कश्मीरी युवक एनडीए एक्जाम पास करने के बाद हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल
  • महाभियोग से न्यायपालिका को डराने की कोशिश कर रही कांग्रेस
  • कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने जारी की उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट
  • कर्नाटक चुनाव: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने चमुंदेश्वरी विधानसभा से नामांकन दाखिल किया
  • कांग्रेस ने CJI दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस उप राष्ट्रपति को सौंपा
  • नरोदा पटिया दंगा मामला: गुजरात HC ने पीड़ितों की मुनाफा मांगने की अपील को खारिज किया
  • भारत के श्रीमंत झा ने एशियाई आर्मरेसलिंग चैंपियनशिप के 80 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता
  • नरोदा पाटिया दंगा मामला: माया कोडनानी को गुजरात HC ने बरी किया, बाबू बजरंगी की सजा बरकरार
  • SC ने महाभियोग को लेकर हो रही मीडिया रिपोर्टिंग पर बैन की मांग पर अटॉनी जनरल 7 मई तक देंगे राय
  • चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग की चर्चा को सुप्रीम कोर्ट ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

देश में नक्सल प्रभावित जिलों में आई कमी, 44 जिले उग्र वामपंथी प्रभाव की सूची से हटाए गए

  |   Updated On : April 15, 2018 04:49 PM
सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

ख़ास बातें
  •  देश में नक्सली हिंसा सिर्फ 30 जिलों तक सिमट कर रह गई हैं
  •  44 जिलों में उग्र वामपंथी गुटों की मौजूदगी का प्रभाव खत्म हो गया
  •  पिछले कुछ सालों में 32 जिले में पिछले कुछ सालों में हिंसा की घटनाएं नहीं हुई हैं

नई दिल्ली:  

देश में पिछले चार सालों के अंदर करीब 44 जिले नक्सल प्रभाव से पूरी तरह से मुक्त हो गए या वहां उनकी नगण्य मौजूदगी है।

केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा ने कहा है कि पिछले चार सालों में रणनीतिक सुरक्षा व्यवस्था और विकास के कामों से नक्सली हिंसा कई जिलों में सिमट कर रह गई।

गौबा ने कहा, '44 जिलों में उग्र वामपंथी गुटों की मौजूदगी का प्रभाव खत्म हो गया या नगण्य रूप में हैं और नक्सली हिंसा सिर्फ 30 जिलों तक सिमट कर रह गई हैं।'

गृह सचिव ने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, पुल, टेलीफोन टावरों के निर्माण गरीब लोगों तक पहुंचा और इन जगहों पर हिंसा के खिलाफ जीरो टोलेरेंस की नीति अपनाई गई।

गृह मंत्रालय ने 10 राज्यों के 106 जिलों को उग्र वामपंथी प्रभावित जिले के रूप में चुना था।

इन जिलों में लगातार यातायात, संचार, गाड़ियों के विस्तार, नक्सलियों के सरेंडर के लिए खर्च, सुरक्षा बलों के लिए निर्माण जैसे कार्य सुरक्षा संबंधी खर्च (एसआरई) योजना के तहत किए गए।

गृह मंत्रालय ने हाल ही में कई राज्यों से सलाह करने के बाद प्रभावित जिलों में सुरक्षा बलों की तैनाती और जमीनी हकीकत में बदलाव को देखते हुए सूची बनाई जिसके बाद 44 जिलों को एसआरई से बाहर किया गया।

अधिकारी के मुताबिक एसआरई के तहत अब 90 जिले आते हैं और उग्र वामपंथी प्रभावित हिंसक जिलों की संख्या भी 35 से 30 पहुंच गई।

रिपोर्ट के अनुसार, 90 जिलों में से 32 जिले में पिछले कुछ सालों में हिंसा की घटनाएं नहीं हुई हैं और 58 जिलों में 2017 के दौरान हिंसा की घटनाएं हुईं।

हालांकि इस दौरान कुछ नए जिले भी सामने आए जिसे एसआरई की सूची में जोड़ा गया और वहां सुरक्षा बल तैनात किए गए।

और पढ़ें: सीरिया ने अमेरिका के 103 मिसाइलों में से 71 को मार गिराया: रूस

RELATED TAG: Maoists Area, Naxal Affected Districts, Naxal Affected Areas, Naxals, Home Ministry, Union Home Secretary, Rajiv Gauba,

देश, दुनिया की हर बड़ी ख़बर अब आपके मोबाइल पर, डाउनलोड करें न्यूज़ स्टेट एप IOS ओर Android यूज़र्स इस लिंक पर क्लिक करें।

Latest Hindi News से जुड़े, अन्य अपडेट के लिए हमें फेसबुक पेज, ट्विटर और गूगल प्लस पर फॉलो करें

न्यूज़ फीचर

मुख्य ख़बरे

वीडियो

फोटो