1961 में नेहरू ने रखी सरदार सरोवर डैम की नींव, 2017 में पीएम मोदी ने किया देश को समर्पित

By   |  Updated On : September 17, 2017 12:48 PM
सरदार सरोवर बांध (PTI फाइल)

सरदार सरोवर बांध (PTI फाइल)

ख़ास बातें
  •  सरदार सरोवर बांध को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को समर्पित कर दिया है
  •  1961 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस बांध की नींव रखी थी

नई दिल्ली:  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 67वें जन्मदिन के मौके पर देश को सरदार सरोवर बांध के रूप में बड़ा उपहार मिला है। यह बांध पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है।

केवड़िया स्थित इस बांध की ऊंचाई 138.68 मीटर की गई है। वहीं इसकी भराव क्षमता अब 4.73 मिलियन एकड़ हो गई है।

इस परियोजना की शुरुआत का सपना आजादी से पहले 1946 में देखा गया था। इस बांध के निर्माण की शुरुआती नींव देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 5 अप्रैल 1961 में रखी थी।

कॉन्क्रीट के उपयोग के मामले में यह बांध देश का सबसे बड़ा बांध है। बांध प्रोजेक्ट के एक अधिकारी ने बताया कि इस बांध की लंबाई 1.2 किमी है, वहीं इसकी गहराई 163 मीटर है। यह अभी तक 4,141 करोड़ यूनिट बिजली दो पावरहाऊस की मदद से बना रहा है।

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इस बांध की क्षमता 12,000 मेगावाट और 250 मेगा वाट है। जिसमें रिवर बेड पावर हाऊस और कनल हैड पावरहाऊल लगा हुआ है। इस बांध से बनी बिजली देश के तीन राज्यों में सप्लाई की जाएगी। जिसमें महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और गुजरात शामिल हैं।

इस बांध से देश के करीब 10 लाख किसान अपने खेतों में सिंचाई कर सकेंगे। इसके साथ ही कई गांवों तक पीने लायक पानी की पहुंच भी बढ़ेगी। इससे होने वाले फायदे का लाभ देश के करीब 4 करोड़ लोगों तक पहुंचेगी। इतना ही नहीं इस बांध की वजह से करीब 200 गांवों में बाढ़ आने का खतरा खत्म हो जाएगा। जिसमें भरुच शहर भी शामिल है।

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वहीं इस बांध के बनने से बेघर हुए लोग लगातार ही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बांध से बनने के बाद जो लोग विस्थापित हुए हैं उन्हें अब तक न तो पूरी तरह से मुआवजा दिया गया है न ही विस्थापित किया गया है। समाजसेविका मेधा पाटकर भी इन लोगों के साथ प्रदर्शन कर रही हैं।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर के प्रदर्शन के कारण बांध का निर्माण कार्य 1996 में रोक दिया गया था। एनबीए कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से इसके लिए स्टे ऑर्डर लिया था। इसमें पर्यावरण और पुनर्वास से संबंधित दलीलें दी गई थीं।

इसके बाद सन 2000 में सुप्रीम कोर्ट ने बेघर हो रहे लोगों को पूरी तरह से मुआवजा देने के बाद इसका काम शुरू करने को कहा था।

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