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कपिल सिब्बल ने कहा, राम की तरह ट्रिपल तलाक आस्था से जुड़ा मामला, कोर्ट को नहीं देना चाहिए इसमें दखल

  |  Updated On : May 16, 2017 11:50 PM
सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक पर सुनवाई जारी (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक पर सुनवाई जारी (फाइल फोटो)

ख़ास बातें
  •  सिब्बल ने कहा कि ट्रिपल तलाक आस्था से जुड़ा मसला है और इसमें सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए
  •  कपिल सिब्बल ट्रिपल तलाक पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से दलील दे रहे थे

New Delhi:  

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के वकील और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने ट्रिपल तलाक की तुलना अयोध्या में जन्मे राम से कर डाली। सुप्रीम कोर्ट में आज चौथे दिन ट्रिपल तलाक पर सुनवाई हुई।

सिब्बल ने कहा कि ट्रिपल तलाक आस्था से जुड़ा मसला है और इसमें सुप्रीम कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि ट्रिपल तलाक आस्था से वैसे ही जुड़ा मामला है जैसे कि अगर मेरी आस्था राम में है तो मैं मानूंगा कि राम अयोध्या में पैदा हुए थे।

सिब्बल ने कहा, ' अगर उस पर सवाल नहीं तो तीन तलाक पर क्यों?' उन्होंने दलील दी कि हम यह नहीं कह रहे ट्रिपल तलाक कोई अच्छी परंपरा है और उसे हमेशा के लिए जारी रखना चाहिए। हम बदलाव चाहते हैं लेकिन हमारा मानना है कि बदलाव के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। किसी दूसरे को इसमें दखल देने से बचना चाहिए।

और पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में AIMPLB ने कहा, तीन तलाक आस्था का विषय है, संवैधानिक नैतिकता का नहीं

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल को टोकते हुए कहा कि कोर्ट में उन्हें राजनीतिक बात करने से बचना चाहिए। इसके बाद सिब्बल ने कहा कि मैं कोर्ट में कभी ऐसा नहीं करता।

लेकिन जज ने टिप्पणी करते हुए कहा, 'ये आपके खून में हैं और आदत आसानी से नहीं जाती।'

सिब्बल ने कहा कि शरीयत पर्सनल लॉ का हिस्सा हैं, इसे मूल अधिकारों के साथ जोड़कर नहीं देख सकते। उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ को संविधान के आधार पर नहीं परख सकते।

उन्होंने कहा कि जहां मुस्लिम देश में हिन्दू विश्वास का संरक्षण होना चाहिए, वही हिन्दू बहुल देश में मुस्लिम परंपराओं का संरक्षण जरूरी हैं। सुनवाई के दौरान जस्टिस नरीमन ने कपिल सिब्बल से सवाल किया कि क्या आप ये कहना चाहते हैं कि हमें इस मामले को नहीं सुनना चाहिए। सिब्बल ने जवाब दिया, 'हां, आपको( कोर्ट को) इसे नहीं सुनना चाहिए।'

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RELATED TAG: Triple Talaq, Supreme Court, Kapil Sibal,

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