चारा घोटाला: एक और मामले में लालू यादव दोषी, जगन्नाथ मिश्र हुए बरी-3 जनवरी को सजा का ऐलान

  |   Updated On : December 23, 2017 05:15 PM
ख़ास बातें
  •  चारा घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू यादव को बड़ा झटका लगा है 
  •  रांची की विशेष अदालत ने लालू को देवघर जिला राजकोष से फर्जी रूप से करीब 85 लाख रुपये निकालने का दोषी करार दिया है
  •  इस मामले में कुल 22 आरोपियों में से 7 को बरी किया जा चुका है जबकि लालू समेत 15 लोगों को दोषी करार दिया गया है

नई दिल्ली :  

चारा घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू यादव को बड़ा झटका लगा है। 

रांची की विशेष अदालत ने लालू को देवघर जिला राजकोष से फर्जी रूप से करीब 85 लाख रुपये निकालने का दोषी करार दिया है। लालू यादव को फिलहाल रांची के बिरास मुंडा जेल भेजा गया है।

वहीं इस मामले में बिहार के अन्य पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है।

कुल 22 आरोपियों में से अदालत ने 7 को बरी किया है जबकि लालू यादव समेत 15 लोगों को दोषी करार दिया गया है। 3 जनवरी को सजा का ऐलान किया जाएगा। 

लालू और जगन्नाथ मिश्रा चारा घोटाले के एक अन्य मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर थे। हालांकि आज के अदालती फैसले के बाद लालू यादव को जेल जाना होगा।

चारा घोटाले में यह दूसरा मामला है, जिसमें लालू दोषी करार दिए गए हैं।

गौरतलब है कि झारखंड हाई कोर्ट ने नवंबर 2014 में लालू यादव को बड़ी राहत देते हुए उन पर लगे घोटाले की साजिश रचने और ठगी के आरोप हटा दिए थे।

हाई कोर्ट ने कहा था कि किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए दो बार सजा नहीं दी जा सकती।

हालांकि सीबीआई की अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए लालू पर आपराधिक मामला चलाने की मंजूरी देते हुए नौ महीनों के भीतर सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया था।

अदालत की सुनवाई से पहले लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने उनके पक्ष में फैसला आने की उम्मीद जताई थी।

तेजस्वी ने कहा, 'हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं और उम्मीद करते हैं कि फैसला हमारे पक्ष में होगा। जैसे 2जी घोटाला और आदर्श घोटाले में बीजेपी के प्रोपेगेंडा का पर्दाफाश हुआ, वैसा ही यहां होगा।'

आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 409, 418, 420, 467, 468, 471, 477 ए, 201 और 511 के तहत दोषी करार दिया गया है। इसके अलावा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 13 (1) और 13 (2) के तहत भी आरोप साबित हुए हैं।

गौरतलब है कि 950 करोड़ रुपये के इस चारा घोटाला मामले में संलिप्तता के लिए लालू यादव को 1997 में बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और जेल भी जाना पड़ा था।

और पढ़ें: मनी लॉन्ड्रिंग: लालू पर फैसले के पहले बेटी मीसा के खिलाफ चार्जशीट

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