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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अलगाववादी नेता शब्बीर शाह, वानी के खिलाफ आरोप तय

  |  Updated On : November 15, 2017 05:06 PM
अलगाववादी नेता शब्बीर शाह (फाइल फोटो)

अलगाववादी नेता शब्बीर शाह (फाइल फोटो)

ख़ास बातें
  •  दिल्ली की अदालत ने शब्बीर शाह, वानी के खिलाफ आरोप तय किए
  •  साल 2005 के कथित टेरर फंडिंग केस में मनी लॉन्ड्रिंग चार्जेस के तहत आरोप तय किए हैं 
  •  दोनों नेताओं ने खुद को आरोपी होने से इंकार किया है और बेगुनाही साबित करने की बात कही है

 

नई दिल्ली:  

दिल्ली की एक अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह और कथित तौर पर हवाला डीलर मोहम्मद असलम वानी के खिलाफ साल 2005 के कथित टेरर फंडिंग केस में मनी लॉन्ड्रिंग चार्जेस के तहत आरोप तय कर दिए हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने यह आरोप तय किए हैं। हालांकि आरोपियों ने अपना दोष मानने से इंकार कर दिया और अपनी बेगुनाही साबित करने का दावा किया है। इसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने मामले में गवाहों के बयान दर्ज करवाने के लिए तीन जनवरी की तारीख तय की है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 सितंबर को चार्जशीट फाइल कर शब्बीर शाह के पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन के चीफ हाफिज़ सईद से रिश्तों का आरोप लगाया था।

इस चार्जशीट में मोहम्मद असलम वानी का भी नाम था जो कि शाह के साथ ही न्यायिक हिरासत में है। कोर्ट ने 19 गवाहों के बयान पर आधारित 700 पन्नों की चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए दोनों को दोषी माना है।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत शाह के बयान को आधार बनाते हुए चार्जशीट दायर की जिसमें कथित तौर पर उसने जांच अधिकारियों को बताया कि उसके पास कमाई का कोई साधन नहीं है और न ही वो आयकर दाता है।

जांच एजेंसी ने 36 वर्षीय वानी का बयान रिकॉर्ड किया है जहां कथित तौर पर उसने कहा कि वह अप्रैल 2003 में श्रीनगर से दिल्ली 'शाह के निर्देशों पर' आया था, और यहां वह उससे पहली बार मिला था। वानी को श्रीनगर में ईडी ने 6 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया था।

ईडी के मुताबिक वानी ने पूछताछ में कबूला था कि शाह ने उसे 'अपने लिए (दिल्ली से हवाला मनी जमा कर श्रीनगर पहुंचाने के लिए ) कमीशन बेस पर काम करने के लिए' कहा था।

क्या है मामला? 

मामला अगस्त 2005 का है जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने वानी को गिरफ्तार किया था।

वानी ने दावा किया था कि उसने शाह को 2.25 करोड़ रुपये दिए थे जिसके आधार पर ईडी ने 2007 में पीएमएलए के तहत दोनों के खिलाफ 2007 में आपराधिक मामला दर्ज कर लिया था।

वानी को 63 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार किया गया था जो कथित तौर पर मध्य पूर्व से हथियारों की खरीद के लिए 26 अगस्त 2005 में हवाला चैनलों के माध्यम से मिले थे।

पूछताछ के दौरान, उसने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि इसमें से 50 लाख शाह को देने थे जबकि 10 लाख रुपये श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के एरिया कमांडर अबू बकर को देने थे और बाकी उसका कमीशन था।

2010 में वानी को दिल्ली की अदालत ने टेरर फंडिंग मामले में बरी कर दिया था लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत आरोपी माना था।

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