कश्मीर में आतंकियों में भगदड़, घाटी छोड़कर भाग रहे: अरुण जेटली

By   |  Updated On : August 13, 2017 11:27 PM
अरुण जेटली (फाइल फोटो)

अरुण जेटली (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:  

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को कहा कि कश्मीर में आतंकवादी अब भारी दबाव में हैं और पत्थरबाजों की संख्या हजारों व सैकड़ों से घटकर 20-30 पर आ गई है।

जेटली ने इंडिया टीवी के दिन भर चलने वाले वंदे मातरम सम्मेलन में कहा, 'मेरा मानना है कि घाटी में हथियारबंद आतंकवादियों पर अब भारी दबाव है और वे भाग रहे हैं। इससे पहले हजारों आतंकवादी नियंत्रण रेखा (एलओसी) को पार करते थे, लेकिन अब इसमें कमी आई है और सुरक्षा बल हावी हैं।'

उन्होंने कहा, 'पहले मुठभेड़ के समय सैकड़ों या हजारों पत्थरबाज अक्सर आतंकवादियों को रास्ता मुहैया कराने के लिए जमा हो जाते थे। आज उनकी संख्या घटकर 20-30 या 50 रह गई है।' मंत्री ने कहा कि अब कोई आतंकवादी आतंकी घटना को अंजाम देने या घाटी में दशकों तक दहशत फैलाने की नहीं सोच सकता। आज उनका जीवन कुछ महीनों का हो गया है।

उन्होंने कहा, 'मैं आतंकवादियों को खत्म करने के लिए खास तौर से जम्मू एवं कश्मीर पुलिस की प्रशंसा करता हूं।' जेटली ने कहा कि नोटबंदी व राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा अलगाववादी नेताओं पर हवाला को लेकर की गई कार्रवाई के कारण पहली बार आतंकवादी घाटी में बैंक लूट रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'आज एलओसी व अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर हमारे बल प्रभावी हैं और इससे आतंकवादियों के लिए घुसपैठ मुश्किल हो गई है, खास तौर से हमारी सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से।'

घाटी में आतंकवादियों द्वारा आईएसआईएस के झंडों के इस्तेमाल के सवाल पर जेटली ने कहा कि देश आईएसआईएस के खतरे से मुक्त है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार चाहती है कि भारत रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बने। इसके लिए हम निजी क्षेत्र को आगे आने को प्रोत्साहित कर रहे हैं। हम निसंदेह अपने आयुध कारखानों व रक्षा उपक्रमों को मजबूत करना जारी रखेंगे।

रक्षामंत्री ने मौजूदा डोकलाम गतिरोध पर किसी तरह की टिप्पणी से इनकार किया। वित्तमंत्री का भी जिम्मा संभाल रहे जेटली ने कहा कि अगले साल के बजट में उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा और ग्रामीण भारत होगा।

बीते साल जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की घटना का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा, 'देश में कुछ ताकतें देश के रक्षा बलों की निंदा करके उन्हें कमजोर करना चाहती हैं। बीते साल जेएनयू में राष्ट्र विरोधी नारे लगाए गए थे।'

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उन्होंने कहा, 'मैं वामपंथी नेताओं को जानता हूं, वे इस तरह के राष्ट्र विरोधी तत्वों का समर्थन करते हैं, लेकिन जब मुख्यधारा के पार्टी नेता इसमें शामिल होते हैं तो यह नुकसानदायक हो जाता है।'

उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, 'क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि इंदिरा जी या राजीव गांधी या नरसिम्हा राव किसी कांग्रेसी नेता के इस तरह के कदम का समर्थन करते?'

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