केरल में 'रामायण माह' मनाने की राजनीतिक रेस में कांग्रेस और वामपंथी संगठन, सीपीएम ने किया इंकार

  |   Updated On : July 14, 2018 12:51 PM
सीपीएम और कांग्रेस (फाइल फोटो)

सीपीएम और कांग्रेस (फाइल फोटो)

केरल:  

केरल में हर साल मनाया जाने वाला 'रामायण माह' इस साल राजनीतिक रंग में डूबता नजर आ रहा है। वामपंथी संगठनों के आयोजन की घोषणा के बाद कांग्रेस संगठन भी बड़े स्तर पर इसे मनाने जा रही है।

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के सांस्कृतिक अंग विचार विभाग ने शुक्रवार को घोषणा की कि 'रामायण परायण' और सेमिनार सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

दक्षिणी राज्य केरल में मलयालम कैलेंडर के आखिरी महीने 'कर्ककिटकम' को हिंदू समुदाय रामायण माह के तौर पर मनाते हैं जो 17 जुलाई से शुरू हो रहा है।

विचार विभाग के अनुसार, एक महीने लंबे चलने वाले इस कार्यक्रम का आयोजन 'रामायणम नम्मुदेथनु, नंदिते ननमयनु' (रामायण हमारा है, यह समाज की अच्छाई है) के बैनर तले होगा।

17 जुलाई को वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। पार्टी सूत्रों ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत 'रामायण परायणम' से होगी। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर और सांसद 'रामायण हमारा है' पर एक भाषण देंगे।

बता दें कि कांग्रेस संगठन की यह घोषणा 'संस्कृत संघ' की घोषणा के बाद आई है जिसमें वामपंथी विद्वान, शिक्षाविद और लेफ्ट समर्थक उसके सदस्य हैं।

संस्कृत संघ ने हाल ही में घोषणा की थी कि इस धार्मिक महीने में वह राज्यव्यापी सेमिनार आयोजित करने जा रही है।

बता दें कि संस्कृत संघ ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के समर्थन को नकारा है और कहा है कि वह एक स्वतंत्र संगठन है।

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लोगों के द्वारा दावा किया जा रहा था कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रभाव को चुनौती देने के लिए सीपीएम रामायण सेमिनार को आयोजित कर रही है।

सीपीएम के राज्य सचिव कोडियेरी बालाकृष्णन ने संस्कृत संघ को सीपीएम के सहायक बताए जाने वाले मीडिया रिपोर्ट्स को बकवास बताया और कहा है कि 'रामायण माह' मनाने की कोई योजना नहीं है।

कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला ने कहा कि 'सीपीएम के विपरीत हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। हम हमेशा धार्मिक त्योहारों पर कई कार्यक्रम आयोजित करते आए हैं। इसलिए हमारे रामायण माह मनाने को सीपीएम के साथ जोड़ने की कोई जरूरत नहीं है।'

बता दें कि रामायण माह के दौरान राज्य के सभी मंदिरों और पारंपरिक जगहों में रामायण के मंत्र गूंजते रहते हैं।

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