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नजर में चीन, रक्षा संबंध मज़बूत करेंगे भारत-जापान, मोदी-आबे की मुलाकात के दौरान बनेगी बात

By   |  Updated On : September 13, 2017 09:06 PM
जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे का स्वागत करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे का स्वागत करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली:  

एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव और उसकी दबाव बनाने की नीति को ध्यान में रखते हुए जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंधों को मज़बूत करने पर जोर दिया जाएगा।

एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंज़ो आबे के बीच गांधीनगर में यूएस-2 एंफीबियस एयरक्राफ्ट खरीदने पर विशेष रूप से चर्चा होगी। साथ ही रक्षा संबंधों में मजबूती लाने के लिये सैन्य हथियारों के संयुक्त विकास और उत्पादन पर भी बातचीत की जाएगी।

दोनों देशों की सालाना बैठक ऐसे समय में हो रही है, क्षेत्र में उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम और परीक्षणों के कारण काफी तनाव है। साथ ही दक्षिण चीन सागर में भी चीन के रुख के कारण इस क्षेत्र में चिंता बनी हुई है। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच इस पर चर्चा होने की संभावना है।

डोकलाम में भारत-चीन के बीच तनाव के दौरान जापान भारत का समर्थन किया था।

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दोनों देशों की नौसेना के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने पर भी मोदी और आबे के बीच चर्चा की जाएगी। इसका एक बड़ा कारण ये भी है कि हिंद महासागर में चीन अपनी दखलंदाज़ी बढ़ा रहा है।

आबे की यात्रा के पहले भारत-जापान रक्षा मंत्री के बीच टोक्यो में बातचीत हुई थी। जिसमें सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन, दोबारा इस्तेमाल किये जा सकने वाले तकनीक और जापान से यूएस-2 शिन्वाया एयरक्राफ्ट खरीदे जाने पर चर्चा की गई थी।

पिछले साल जापान भारत को सस्ते दामों में हथियार देने की खबरों पर चीन ने नाराज़गी जताई थी।

भारत और जापान के बीच बातचीत के बाद जारी किये जाने वाले संयुक्त बयान में रक्षा सहयोग पर जोर होने की संभावना है।

भारत और जापान रक्षा क्षेत्र में अनमैन्ड ग्राउंड वीकल और रोबोटिक्स में तकनीकी और रिसर्च के क्षेत्र में सहयोग पर सहमत हुए हैं।

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दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग को लेकर चर्चा किये जाने की संभावना है। इस बैठक में इस करार को कैसे आगे ले जाया जाए, इस पर चर्चा हो सकती है।

दोनों देशों के बीच हुए परमाणु करार हुआ है जो इस साल जून से लागू हो चुका है। भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है। फिर भी ये करार हुआ है और जापान परमाणु बिजली बनाने की तकनीक भारत को देगा। भारत पहले ऐसा देश होगा जो बिना एनपीटी पर हस्ताक्षर किये जापान से परमाणु तकनीक प्राप्त करेगा।

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