बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट के जजों से की मुलाकात, जल्द विवाद सुलझने का दिया भरोसा

  |   Updated On : January 14, 2018 07:07 PM
फाइल फोटो

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नई दिल्ली:  

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को जस्टिस जे.चेलमेश्वर और दो अन्य जजों से मुलाकात की।

चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में एक हैं जिन्होंने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से मतभेदों को लेकर सार्वजनिक तौर पर सामने आए थे। प्रतिनिधिमंडल ने जस्टिस चेलमेश्वर से उनके आवास पर मुलाकात की और मुद्दे पर करीब 45 मिनट तक चर्चा की।

सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा से अपने मतभेदों को सार्वजनिक करने के दो दिन बाद प्रतिनिधिमंडल ने इससे पहले जस्टिस आर.के. अग्रवाल और उसके बाद न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर से मुलाकात की।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने न्यायाधीश अरुण मिश्रा से मुलाकात की।

बीसीआई ने शनिवार को निर्णय लिया था कि एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को सुप्रीम कोर्ट के जजों से मिलेगा जिससे कि जल्द से जल्द संकट को हल किया जा सके।

वहीं दूसरी तरफ दिल्ली बार एशोसिएसन ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और 4 जजों से सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही को पहले की तरह चलाने का आग्रह किया है। दिल्ली बार एशोसिएसन ने कहा कि हमारा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के भीतर जो भी मुद्दे है उन्हें वहीं सुलझाया जा सकता है।

बीसीआई ने शनिवार को एक बयान में कहा था, 'काउंसिल का सर्वसम्मति से यह मानना है कि यह हाई कोर्ट का आंतरिक मामला है। काउंसिल को उम्मीद और विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट के जज इस मुद्दे की गंभीरता समझेंगे और भविष्य में इस तरह की किसी भी स्थिति से बचेंगे जिसका राजनीतिक दल या उनके नेता अनुचित फायदा उठा सकते हैं और इससे हमारी न्यायपालिका को नुकसान पहुंच सकता है।'

काउंसिल ने राजनीतिक दलों और राजनेताओं से न्यायपालिका की आलोचना नहीं करने और इसे मुद्दा नहीं बनाने का आग्रह किया क्योंकि इससे न्यायापालिका की स्वतंत्रता कमजोर होगी, जो कि लोकतंत्र की रक्षक है।

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बीसीआई के अध्यक्ष मनन मिश्रा ने कहा कि यह 'बहुत दुर्भाग्यपूर्ण' है कि चार वरिष्ठ जजों ने प्रेस कांफ्रेंस की और यह संदेश दिया कि हाई कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को आंतरिक रूप से सुलझाया जाना चाहिए था।

मिश्रा ने कहा कि यह एक पारिवारिक विवाद है और इसे न्यायापालिका के भीतर ही सुलझाया जाना चाहिए था।

उल्लेखनीय है कि चार जजों - न्यायमूर्ति जे.चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति कुरयिन जोसेफ ने शुक्रवार को अदालती मामलों के आवंटन को लेकर प्रधान न्यायाधीश की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि शीर्ष अदालत की प्रशासनिक व्यवस्था ठीक नहीं है।

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