Breaking
  • कोलकाता टेस्ट: श्रीलंका के खिलाफ टीम इंडिया पहली पारी में 172 रनों पर ऑलआउट
  • अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास भूकंप, रिक्टर स्केल पर 6.4 तीव्रता

दिल्ली की हवा में घुला जहर, यहां सांस लेने का मतलब रोज 50 सिगरेट पीना

  |  Updated On : November 09, 2017 06:25 PM
दिल्ली में स्मॉग (फाइल फोटो)

दिल्ली में स्मॉग (फाइल फोटो)

नई दिल्ली :  

देश की राजधानी दिल्ली का स्मॉग से बुरा हाल है। इस जहरीली हवा ने दिल्लीवासियों का हाल बेहाल कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव बुजुर्गों, बच्चों और रोगियों पर पड़ेगा। दिल्ली को अभी भी स्मॉग से राहत नहीं मिली है।

राजधानी में हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 451 तक जा पहुंचा है, जबकि इसका अधिकतम स्तर 500 है। इस हवा में सांस लेने का मतलब है करीब 50 सिगरेट रोज पीने जितना धुआं आपके शरीर में चला जाता है।

बीमार लोगों के अलावा स्वस्थ लोगों के लिए भी यह जहरीली हवा हानिकारक है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, यह स्वास्थ्य की आपात स्थिति है, क्योंकि शहर व्यावहारिक रूप से गैस चैंबर में बदल गया है।

आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, 'धुंध एक जटिल मिश्रण है और इसमें अलग-अलग प्रदूषक तत्व जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और धूल कण मिले होते हैं। यह मिश्रण जब सूर्य के प्रकाश से मिलता है तो एक तरह से ओजोन जैसी परत बन जाती है। यह बच्चों और बड़ों के लिए एक खतरनाक स्थिति है। फेफड़े के विकारों और श्वास संबंधी समस्याओं वाले लोग इस स्थिति में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।'

डॉ. अग्रवाल ने कहा, 'वायु प्रदूषण हर साल दिल्ली में 3,000 मौतों के लिए जिम्मेदार है, यानी हर दिन आठ मौतें। दिल्ली के हर तीन बच्चों में से एक को फेफड़ों में रक्तस्राव की समस्या हो सकती है। अगले कुछ दिनों तक घर के अंदर रहने और व्यायाम या टहलने के लिए बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।'

और पढ़ें: स्मॉग की चादर में लिपटी दिल्ली का घुटा दम, ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल

आईएमए ने दिल्ली-एनसीआर के सभी स्कूलों के लिए सलाह या एडवाइजरी जारी करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री से पहले ही अपील की है, ताकि रेडियो, प्रिंट और सोशल मीडिया जैसे अलग-अलग मीडिया माध्यमों से इसे प्रसारित किया जा सके। 19 नवंबर को एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन को रद्द करने के लिए भी अनुरोध किया है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया, 'जब भी आद्र्रता का स्तर उच्च होता है, वायु का प्रवाह कम होता है और तापमान कम होता है, जब कोहरा बन जाता है। इससे बाहर देखने में दिक्कत आती है और सड़कों पर दुर्घटनाएं होने लगती हैं। रेलवे और एयरलाइन की सेवाओं में भी देरी होने लगती है। जब वातावरण में प्रदूषण का स्तर उच्च होता है तो प्रदूषक कण कोहरे में मिल जाते हैं, जिससे बाहर अंधेरा छा जाता है। इसे ही स्मॉग कहा जाता है।'

उन्होंने कहा, 'धुंध फेफड़े और हृदय दोनों के लिए बहुत खतरनाक होती है। सल्फर डाइऑक्साइड की अधिकता से क्रोनिक ब्रॉन्काइटिस हो जाती है। उच्च नाइट्रोजन डाइऑक्साइड स्तर से अस्थमा की समस्या बढ़ जाती है। पीएम10 वायु प्रदूषकों में मौजूद 2.5 से 10 माइक्रोन साइज के कणों से फेफड़े को नुकसान पहुंचता है। 2.5 माइक्रोन आकार से कम वाले वायु प्रदूषक फेफड़ों में प्रवेश करके अंदर की परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रक्त में पहुंचने पर ये हृदय धमनियों में सूजन कर सकते हैं।'

और पढ़ें: ऑड-ईवन: दिल्ली में 13 से 17 नवम्बर के बीच फिर लागू होगा नियम, दोपहिया और CNG गाड़ियों को छूट

प्रदूषण स्तर बढ़ने पर सावधानियां :

  • अस्थमा और क्रोनिक ब्रॉन्काइटिस वाले मरीजों को अपनी दवा की खुराक बढ़ानी चाहिए।

  • स्मॉग की परिस्थितियों में अधिक परिश्रम वाले कामों से बचें।

  • धुंध के दौरान धीमे ड्राइव करें।

  • धुंध के समय हृदय रोगियों को सुबह में टहलना टाल देना चाहिए।

  • फ्लू और निमोनिया के टीके पहले ही लगवा लें।
    `
  • सुबह के समय दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें।

और पढ़ें: दिल्ली से लेकर लाहौर तक छाया जहरीला स्मॉग, नासा ने जारी की तस्वीर

RELATED TAG: Smog In Delhi, Cigarettes, Air Pollution,

देश, दुनिया की हर बड़ी ख़बर अब आपके मोबाइल पर, डाउनलोड करें न्यूज़ स्टेट एप IOS ओर Android यूज़र्स इस लिंक पर क्लिक करें।

Latest Hindi News से जुड़े, अन्य अपडेट के लिए हमें फेसबुक पेज, ट्विटर और गूगल प्लस पर फॉलो करें

न्यूज़ फीचर

मुख्य ख़बरे

वीडियो

फोटो