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निमोनिया के बाद बढ़ जाता है दिल के दौरे का खतरा, ऐसे रखें ख्याल

  |  Updated On : May 18, 2017 01:30 PM

नई दिल्ली:  

किसी व्यक्ति को निमोनिया, जुकाम व ब्रॉन्काइटिस जैसे श्वसन संबंधी संक्रमण होने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा 17 गुना तक बढ़ जाता है। शोध के नतीजो से पता चलता है कि इसका खतरा श्वसन संबंधी संक्रमणों की शुरुआत में जरूरी नहीं है। यह पहले सात दिनों में चरम पर होता है, फिर धीरे-धीरे कम होता है, लेकिन एक महीने तक बना रहता है।

सिडनी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व हृदय रोग विशेषज्ञ जिओफ्री टोफलर ने कहा, 'हमारे नतीजे पहले की सुझावों की पुष्टि करते हैं कि श्वसन संबंधी संक्रमण से दिल के दौरे का जोखिम बढ़ाने का काम करते हैं।'

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टोफलर ने कहा, 'श्वसन संबंधी संक्रमण दिल के दौरे का खतरा क्यों बढ़ाते हैं, इसके संभावित कारण में खून का थक्का जमने की प्रवृत्ति, सूजन और रक्त वाहिकाओं को विषाक्त पदार्थ से नुकसान व खून के बहाव में बदलाव शामिल है।'

इसके अलावा जो लोग मध्यम ऊपरी श्वसन नलिका में संक्रमण के लक्षणों जैसे कि जुकाम, फैरेगिंटिस, राहिनिटिस व सिनुसिटिस से पीड़ित हैं उनमें दिल का दौरा पड़ने का खतरा 13 गुना होता है।

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निमोनिया के कारण 

स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया वायरस के कारण ये बीमारी होती है। जिसके कारण फेफड़ों में तरल पदार्थ जम जाता है। यह ज्यादातर कमजोर इम्यून सिस्टम वालें लोगों को होती है। ऐसे में बच्चों में इसके होने का खतरा सबसे ज्यादा माना जाता है। यह ज्यादातर मानसून में होती है। खांसी, जुकाम, बुखार, सांस ना आना आदि इसके प्रमुख लक्षण माने जाते है। 

ऐसे करें बचाव :

  • निमोनिया से बचने के लिए आपके अपने खाने में हल्दी और लहसुन की मात्रा को बढ़ाना चाहिए। दोनो ही आहार प्राकृतिक एंटीबायटिक माने जाते है। ऐसे में ये आपके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते है। 
  • वहीं निमोनिया होने पर गाजर का जूस आपको जल्दी रिकवरी करने में मददगार होता है। गाजर में मौजूद विटामिन ए और ई फेफड़ों को मजबूत करती है। और शरीर के इम्यून सिस्टम को ताकत देती है। 

IANS के इनपुट के साथ 

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