चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल: क्या क्रिकेट की जीत पर पाकिस्तान की सेना सियासत कर रही है ?

By   |  Updated On : June 20, 2017 05:48 PM

नई दिल्ली:  

फाइनल में भारत को 180 रन से हराने के बाद पाकिस्तान ने अपना पहला चैंपियंस ट्रॉफी खिताब जीता। देखें तो यह महज एक मैच था जिसमें भारत से बेहतर पाकिस्तान ने खेला और इसलिए वो जीती।

फाइनल में हार के बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा, 'पाकिस्तान टीम को बधाई। उनका यह टूर्नामेंट शानदार रहा। उन्होंने जिस तरह से चीजें बदली वह उनके पास मौजूद प्रतिभा को बताता है। उन्होंने एक बार फिर साबित किया कि वह अपने दिन किसी भी टीम को हरा सकते हैं। पाकिस्तान ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी शानदार गेंदबाजी के दम पर हमसे वो गलतियां करवाई, जो वे चाहते थे। हमें यह कहने में कोई शर्म नहीं है कि हमने फाइनल मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं किया।'

भारतीय कप्तान ने खेल भावना के तहत जितनी आसानी से हार को स्वीकार कर लिया शायद पाकिस्तान की आर्मी अपने जीत पर उस खेल भावना को नहीं बनाए रख पा रही है।

पाकिस्तानी आर्मी प्रवक्ता मेजर आर्मी जनरल आसिफ गफूर ने एक के बाद एक ऐसे ट्वीट किए जिसे पढ़कर साफ लगता है कि पाकिस्तानी सेना इस जीत को सियासी रंग देने में लगी है।

आसिफ गफ्फार ने पाकिस्तान के टीम के खिलाड़ियों को फौजी कहा है और लिखा है कि हम सब एक हैं और हर खतरे के खिलाफ एकजूट है।

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि कुछ भी टीम वर्क को नहीं हरा सकती। पाकिस्तान हर खतरे के खिलाफ टीम की तरह है।

बलूचिस्तान की एक तस्वीर के जरिए पाक आर्मी ने बताने की कोशिश की है कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा है और लोग वहां पाकिस्तान की जीत से खुस है।

इन सभी ट्वीट्स को देखकर साफ पता चलता है कि पाकिस्तान की आर्मी चैंपियंस ट्रॉफी की जीत को सियासी रंग देने में लगी है। भारत ने आईसीसी टूर्नामेंट में पाकिस्तान को 16 में से 13 बार हराया है।

क्रिकेट के हर मैच में कोई टीम जीतती है तो कोई हारती है। फाइनल से पहले धोनी की पाकिस्तानी कप्तान सरफराज के बेटे के साथ तस्वीर वाइरल हुई थी जिससे पता चल गया था कि खिलाड़ी मैदान पर कितना भी एक-दूसरे का विरोध करें लेकिन मैदान के बाहर एक-दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त होते हैं।

जहां तक जंग की बात है तो पाकिस्तान को भारत ने हर जंग में हराया है। यह सच इतिहास के पन्नों में दर्ज है, इसलिए पाक आर्मी को भी इस जीत को खेल के मैदान की जीत की तरह ही लेना चाहिए जंग से जोड़कर इसे देखना कहीं से उचित नहीं हैं।

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