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पद्मावती विवाद: भंसाली संसदीय समिति को दी सफाई-कहा अफवाहों पर अधारित है विवाद

  |  Reported By  :  Ravi Kant Rai  |  Updated On : December 01, 2017 08:47 AM

नई दिल्ली:  

संसद की सूचना एवं प्रौद्योगिकी की स्थायी समिति के सामने आज पेश हुए 'पद्मावती' के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने अपना पक्ष रखा। भंसाली ने कहा कि फिल्म में  16वीं सदी की राजपूत रानी के बारे में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि फिल्म पर विवाद अफवाहों की वजह से उठे हैं।

भंसाली ने भारतीय सूफी कवि मलिक मुहम्मद जायसी के महाकाव्य 'पद्मावत' का संदर्भ बताते हुए कहा, 'फिल्म को लेकर सारा विवाद अफवाहों पर आधारित है। मैंने तथ्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं किया है। फिल्म मलिक मुहम्मद जायसी के काव्य पर आधारित है।' 

स्थायी समिति के सदस्यों ने दो घंटे से ज्यादा समय तक भंसाली से फिल्म के संबंध में सवाल किए। पैनल के कई सवालों पर भंसाली चुप्पी साध गए।  पैनल के सदस्यों ने भंसाली से यह पूछा कि आपने सेंसर बोर्ड को भेजने से पहले कुछ चुनिंदा लोगों को यह फ़िल्म क्यूं दिखाई, जिसके जवाब पर भंसाली चुप्पी साध गए।

कमेटी ने कहा, 'आप कह रहे हैं कि ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ नही किया लेकिन अगर आप उसी नाम से और उसी घटना के आधार पर फ़िल्म बना रहे हैं तो क्या संभव है कि तथ्यों से छेड़छाड़ न हो?'

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सूत्र के मुताबिक पैनल ने भंसाली से पूछा, 'आपने ये कैसे मान लिया कि फिल्म 1 दिसंबर को रिलीज हो सकती है जब आपने इसे सीबीएफसी के पास 11 नवंबर को भेजा। सिनैमोटोग्राफी एक्ट के तहत फिल्म को सर्टिफिकेशन के लिए 68 दिन पहले दिखाया जाता है।'

उन्होंने पूछा, 'सिलेक्टिव मीडिया के लिए फिल्म की स्क्रीनिंग करना कहां तक निष्पक्ष और नैतिक है? क्या ये कदम सीबीएफसी को प्रभावित करने के लिए तो नहीं था।'

सूत्रों ने बताया कि भंसाली से पूछा गया क्या फिल्म को बेचने के लिए विवाद खड़ा करना नया ट्रेंड हैं। उन्होंने पूछा कि जब इस फिल्म को लेकर पिछले डेढ़ साल से विवाद चल रहा है तब आपने इसे ठीक करने के लिए कदम क्यों नहीं उठाया?

पैनल ने कहा कि ऐसा लगता है कि आपकी फिल्में दो समुदायों के बीच तनाव पैदा करने के लिए ही बनाई जाती है।

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली 30 सदस्यी संसदीय समिति से भंसाली ने कहा, 'हमारा मकसद किसी की भावना को आहत करना नहीं है।' समिति की बैठक में कांग्रेस सांसद राज बब्बर और भाजपा के वरिष्ठ नेता एल. के. आडवाणी भी शामिल थे।

ठाकुर ने एक बयान में कहा कि उन्होंने 'पद्मावती' को लेकर कुछ सवाल किए और उन सवालों पर ध्यान देने को कहा गया। फिल्म के निर्देशक को फिल्म और उसको लेकर हुए विवाद के बारे में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब समिति के पास 14 दिसंबर तक दाखिल करने को कहा गया है।

ठाकुर ने फिल्म की अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को जान से मारने की धमकी के संदर्भ में कहा कि मीडिया ने भी दर्शकों में भावना भड़काने में भूमिका निभाई है।

समिति में शामिल सदस्यों में कांग्रेस के सी. पी. जोशी, भाजपा के ओ. एम. बिड़ला और शिवसेना के राजन विचारे ने फिल्म के बारे में आपत्ति जाहिर की।

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फिल्म 'पद्मावती' पर इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप लग रहे हैं। दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर और रणवीर सिंह जैसे सितारों से सजी फिल्म की रिलीज डेट टलने से फिल्म की कास्ट और मेकर्स काफी परेशान हैं। पहले यह फिल्म 1 दिसंबर को रिलीज हो रही थी, लेकिन अब इसे लेकर सस्पेंस बरकरार है।

राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत पूरे देश में ​राजपूत और करणी सेना 'पद्मावती' ​का लगातार विरोध कर रही है। करणी सेना व अन्य राजपूत समुदाय फिल्म को बैन करने की मांग कर रहे हैं।

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