गणेश चतुर्थी 2018: गणपति पूजा का ये है शुभ मुहूर्त, इस तरह करें बप्पा की मूर्ति स्थापना

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नई दिल्ली:

13 सितंबर से गणपति बप्पा हर घर में पधारने आ रहे है, जो पूरे दस दिन अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसाएंगे। गणेश चतुर्थी को लेकर पूरे देश में तैयारियां जोरों पर है। गणेश चतुर्थी का यह त्योहार भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है लेकिन महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी पर एक ओर जहां पंडालों में गौरी पुत्र गणेश की बड़ी-बड़ी प्रतिमा की स्थापना करते है वहीं दूसरी ओर भक्त अपने घरों में भी गजानन को विराजमान करते है। 

लोग शुभ मुहुर्त के हिसाब से गणपति को घर में स्थापित करना चाहते हैं ताकि पूजा का सही फल मिल सके। आप भी अपने घर में गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करना चाहते हैं तो जानें क्या है गणपति स्थापना का तरीका,पूजा की सही विधि और शुभ मुहूर्त। 

शुभ मुहूर्त

इस बार गणेश जी की पूजा प्रारम्भ करने का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बज कर 08 मिनट पर शुरू होगा। दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक स्थापना का समय शुभ है।

स्थापना करने का सही तरीका

पूजा स्थल में मूर्ति स्थापना करने से पहले अच्छी तरह से साफ सफाई कर लें। जिस चौकी पर गणेश जी की मूर्ति रखनी है, इस पर लाल रंग का कपड़ा बिछा कर अक्षत यानि चावल रखें।अब इस पर मूर्ति को स्थापित करें। स्थापना करने के बाद मूर्ति को दूर्वा, गंगाजल और पान के पत्ते से स्नान करवाएं। आप पीले वस्त्र या फिर मोली को वस्त्र मानकर भी गणेश जी को अर्पित कर सकते हैं। अब गणेश जी को रोली से तिलक लगा कर फूल चढ़ाए और भोग लगाकर पूरा,अर्चना, मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करें। 

इस तरह शुरू करें पूजा

गणेश चतुर्थी की पूजा करने से पहले नई मूर्ति लाना जरूरी है। इस प्रतिमा को आप अपने मंदिर या देव स्थान में स्थापित कर सकते हैं लेकिन इससे पहले भी कई खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अगर आप गणपति जी की मूर्ति को किसी कारण स्थापित नहीं कर सकते तो एक साबुत पूजा सुपारी को गणेश जी का स्वरूप मानकर उसे घर में रख सकते हैं। 

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बता दें कि मान्यता के अनुसार श्री गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था। इसीलिए हर साल इस दिन गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाती है। भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है।

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