'पद्मावती' ​विवाद: मशहूर गीतकार संतोष आनंद बोले- इतिहास पर फिल्में बनाते हैं, तो इससे छेड़छाड़ ना करें

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नई दिल्ली:

नये साल का आगाज होने से महज कुछ दिन पहले नोएडा में शुक्रवार (8दिसंबर) को 'मृग्या' बैंड ने अपने कंसर्ट में बेहतरीन धुनों से सबको अपना दीवाना बना दिया।

बैंड ने हिंदी सिनेमा जगत के मशहूर गीतकार व कवि संतोष आनंद के सबसे चर्चित गीतों में शुमार 'एक प्यार के नगमा' पर कंसर्ट की थीम रखी। कंसर्ट में बतौर अतिथि शिरकत करने वाले शब्दों के जादूगर संतोष आनंद एक बार फिर अपने गीतों से समां बांधने में कामयाब रहे।

इस दौरान उन्होंने अपनी आवाज में अपने फैंस के लिए 'शोर' फिल्म का गाना 'एक प्यार का नगमा' गया, जिसे 1972 में लता मंगेशकर और मुकेश ने अपनी आवाज दी थी। रोटी-कपड़ा और मकान, प्रेम रोग, उपकार, प्यासा सावन जैसी फिल्मों में दिल छू लेने वाले गीत लिखने वाले संतोष आनंद दो बार फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजे जा चुके हैं।

न्यूज स्टेट डॉट कॉम पर गीतकार संतोष आनंद ने गीतों के साथ हाल ही में बॉलीवुड से लेकर राजनीति गलियारों में गहराये 'पद्मावती' विवाद पर चर्चा की। उस चर्चा के कुछ अंश हम आपसे साझा करने जा रहे हैं।

सवाल: 'एक प्यार का नगमा' गाने की सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे और इसे लिखने की प्रेरणा कहां से मिली?
जवाब: मैंने इस गीत को अपने किसी खास के लिए लिखा था। मैं उसका नाम नहीं बता सकता हूं। लेकिन अब तो सबसे जुड़ चुका है। जब मैं शिकागो गया तो वहां के संचालक ने एक बात कही, हर देश का एक एंथम होता है, लेकिन 'आलम ए एंथम' तो संतोष ने लिखा।

मेरी लिये इससे बड़ी बात कोई और भी नहीं है। मुझे इससे ज्यादा और क्या मिलेगा। आप मुझ तक पहुंचते रहे और मैं आप तक इसे ही सफलता कहते हैं।

सवाल: कहा जाता है हर सफल पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है। आपकी सफलता के पीछे किसका हाथ है?
जवाब: मेरी सफलता के पीछे भी महिला का ही हाथ है। इसमें कोई दो राय नहीं है। 'जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है।' अब आप इसे कहीं भी जोड़ कर देख लें।

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सवाल: क्या आप अपने चाहने वालों से उस खास का नाम साझा करना चाहेंगे?

जवाब: कुछ चीजें मेरे पास ही रहने दें। अगर मैं उसका नाम सरेआम कर दू्ंगा, तो मेरे पास क्या रहेगा। एक ही तो चीज है, जो मुझे जिंदगी जीने की प्रेरणा देती है। वो शायद मेरे दिल में है।

सवाल: बॉलीवुड में नये गीतकारों और कवियों से आप कितना सहमत हैं और उन्हें कोई संदेश देना चाहेंगे?

जवाब: जमाना बदल गया है, पीढ़ियां बदल गई हैं। लेकिन जिंदगी की जरूरतें जस की तस हैं। दुनिया में अगर कोई चीज है जो अमर है और लोगों को आगे बढ़ने की प्ररेणा देता रहेगा, वह प्रेम है अगर हम लोगों में आपस में प्यार नहीं रहेगा, तो जिंदगी रुक जाएगी।

इसे नदी की तरह बहने दो। इसके साथ ही उन्होंने बॉलीवुड के नये गीतकारों को संदेश दिया कि वह अगर लोगों को जोड़कर अपने गातों लिखेंगे, उन्हें समझते हुए अपने शब्दों की माला पिरोएंगे, तभी वह लोगों तक पहुंचेगा। अपने आपको अपने तक सीमित मत रखो, लोगों में बांट दों। तभी गीत बनेगा और इसके बाद संगीत बनेगा।

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सवाल: हाल ही में निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावती' पर खासा विवाद गहराया, जिसके कारण बॉलीवुड और राजनीति हस्तियां दो धड़ों में बंट गई हैं। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

जवाब: 'पद्मावती' के बारें में मैं भी अच्छे से नहीं जानता हूं। फिल्में बनती हैं मनोरंजन के ​लिए। लेकिन अगर आप इ​तिहास पर फिल्म बनाते हैं, तो उससे छेड़छाड़ मत करो। मैंने अभी तक फिल्म नहीं देखी नहीं है, इसलिए में सीधा इस पर कुछ नहीं कह सकता हूं।

'मुगले आजम' एक काल्पनिक फिल्म है, उसे भी लोगों ने इतिहास से जोड़ दिया। लेकिन वह पूरी तरह से काल्पनिक है। इस मामले पर मेरा यही कहना है कि ऐसा कोई भी काम ना करें, जिससे लोगों के दिलों को चोट पहुंचे। वहीं लोगों को भी समझना चाहिए कि यह फिल्म मनोरंजन के लिए है, उसे उसी तरीके से लें। खैर, सेंसर बोर्ड का फैसला इसमें सबसे अहम है।

अगर हम ये कहें कि शुक्रवार की शाम गीतकार संतोष आनंद के नाम रही, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। वहां आए लोगों ने गीतकार संतोष आनंद के साथ सेल्फी ली और हर कोई इन यादगार लम्हों को कैद करने को आतुर दिखाई दिया।

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HIGHLIGHTS

  • दुनिया में अगर कोई चीज है जो अमर है और लोगों को आगे बढ़ने की प्ररेणा देता रहेगा, वह प्रेम है अगर हम लोगों में आपस में प्यार नहीं रहेगा, तो जिंदगी रुक जाएगी: संतोष आनंद
  • इस मामले पर मेरा यही कहना है कि ऐसा कोई भी काम ना करें, जिससे लोगों के दिलों को चोट पहुंचे। वहीं लोगों को भी समझना चाहिए कि यह फिल्म मनोरंजन के लिए है, उसे उसी तरीके से लें

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