भीमा कोरेगांव हिंसा: पुणे पुलिस को राहत, 90 दिन में गिरफ्तार 5 कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ फाइल करनी होगी चार्जशीट

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नई दिल्ली:

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार 5 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को लेकर पुणे सेशन कोर्ट ने पुणे पुलिस को बड़ी रहात दी है। कोर्ट ने पुणे पुलिस को राहत देते हुए सभी आरोपियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल करने के लिए 90 दिन का समय दिया है। बता दें कि पुलिस ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में हालिया गिरफ्तारी के अलावा जून महीने में रोना विल्सन सहित एक्टिविस्ट सुधीर धावले, वकील सुरेंद्र गडलिंग, एक्टिविस्ट महेश राउत, शोमा सेन को गिरफ्तार किया था।

वहीं आरोपी सुरेंद्र गडलिंग और शोमा सेन के जमानत याचिका मामले में 6 सितम्बर को पुणे कोर्ट में सुनवाई होगी। इसके साथ ही इन दोनों को यरवडा जेल से किसी अन्य जेल में भेजने की याचिका पर भी 6 सितम्बर को सुनवाई होगी। बता दें कि आरोपियों को दूसरे जेल में शिफ्ट करने की याचिका जेल प्रशासन की तरफ से की गई है। उनका कहना है कि यरवडा जेल में काफी भीड़ है इसके साथ ही उनकी सुरक्षा का भी सवाल है इसलिए उन्हें किसी अन्य जेल में भेजा जाए।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस को पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं वरवर राव, अरुण फरेरा, गौतम नवलखा, वर्णन गोंजाल्विस और सुधा भारद्वाज को पुलिस कस्टडी देने की मांग को ठुकरा दिया था।   

दरअसल पुलिस की मांग थी कि सभी गिरफ्तार किए गए लोगों को पूछताछ के लिए कस्टडी में दिया जाए लेकिन कोर्ट ने उनकी मांग को ठुकराते हुए कहा कि सभी लोग हाउस अरेस्ट रहेंगे मतलब उनके घर में जा कर ही पुलिस को पूछताछ करनी पड़ेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस को 5 सितम्बर तक सभी ज़रूरी दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया था। 

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद पुणे पुलिस के सूत्रों ने दावा किया कि गिरफ्तारी ऐसे सबूतों के आधार पर हुई है, जिनसे पता चलता है कि आरोपी 'बड़ी साजिश' रच रहे थे।

क्या है मामला

महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां ने मंगलवार को मुंबई, रांची, हैदराबाद, फरीदाबाद, दिल्ली और ठाणे में छापेमारी की और कुल 5 लोगों को गिरफ़्तार किया है।

अभी तक वरवर राव, अरुण फरेरा, गौतम नवलखा, वर्णन गोंजाल्विस और सुधा भारद्वाज की गिरफ्तारी हुई है। इससे पहले पुलिस ने इन सभी लोगों के घर पर छापेमारी की।

पिछले साल 31 दिसंबर को एल्गार परिषद के एक कार्यक्रम के बाद पुणे के पास कोरेगांव - भीमा गांव में दलितों और उच्च जाति के पेशवाओं के बीच हुई हिंसा की घटना की जांच के तहत इनके घर परा छापेमारी की गई है। 

पुलिस ने इन सभी आरोपियों के ख़िलाफ़ 153 A, 505(1) B,117,120 B,13,16,18,20,38,39,40 और ग़ैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम एक्ट (UAPA) के तहत मामला दर्ज़ किया है।

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पुलिस अधिकारी के मुताबिक इन लोगों को उनकी कथित नक्सली गतिविधियों को लेकर आईपीसी और गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून की संबद्ध धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है।

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