बिहार में सुशासन? नहीं थम रही मॉब लिंचिंग, लाखों रुपये लूटने आये बदमाश की पीट-पीटकर हत्या

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नई दिल्ली:

बिहार में मॉब लिंचिंग की घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सासाराम में उग्र भीड़ ने चोर की पीट-पीट कर हत्या कर दी। जानकारी के मुताबिक, 20 वर्षीय बदमाश अपने दो साथियों के साथ रेलवे कर्मचारी से 24 लाख लूटने की कोशिश कर रहे थे। लोगों को डराने के लिए बदमाशों ने फायरिंग कर दी , जिसमें एक महिला घायल हो गई। अशोक कुमार और शैलेश कुमार बैंक में 24 लाख की रकम बैंक में जमा करवाने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान बाइकसवार तीन बदमाशों ने पैसों से भरा बैग छीनने की कोशिश की।

छीनाझपटी के दौरान आस पास मौजूद लोग इक्कट्ठे हो गए और बदमाशों ने गोली चला दी। गोली लाली कुंवर नाम की एक महिला को जा लगी जिसके बाद गुस्से भीड़ ने एक बदमाश धर दबोच कर बुरी तरह पिटाई कर दी। इलाज के दौरान घायल बदमाश की अस्पताल में मौत हो गई। बदमाशों की गोली से घायल महिला को उपचार के लिए सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस मामले पर पुलिस का कहना है की अन्य दो झपटमारों की तलाश के लिए सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है।

इस वारदात ने एक बार फिर बिहार के सुशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक हफ्ते के भीतर ये तीसरी मॉब लिंचिंग की घटना सामने आई है। अब तक पांच लोग भीड़तंत्र का शिकार हो चुके हैं। सोमवार को सीतामढ़ी जिले में चोरी के शक में पिक अप वन ड्राइवर की हत्या कर दी गई थी। 7 सितम्बर को बेगूसराय भीड़ ने तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।  हथियार बंद तीन बदमाश एक स्कूल के अंदर छात्रा को अगवा करने के इरादे से घुसे थे।

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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से रेडियो, टेलीविजन और अन्य मीडिया मंचों पर मॉब लिंचिंग से संबंधित उसके दिशानिर्देशों का बड़े पैमाने पर प्रचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने दिशानिर्देश में बताया था कि किसी भी प्रकार की भीड़ की हिंसा में संलिप्त होने पर कानून के अंतर्गत गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट 

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देश भर में हो रही मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट पीटकर की जाने वाली हत्या) की घटनाओं की निंदा की। कोर्ट ने संसद से इस अपराध से निपटने के लिए कानून बनाने का सिफारिश की और कहा कि यह कानून-व्यवस्था और देश की सामाजिक संरचना के लिए खतरा है।

गौरक्षकों और हिंसक भीड़ के अपराधों से निपटने के लिए निवारक, उपचारात्मक और दंडनीय कदमों सहित कई दिशानिर्देश जारी करते हुए अदालत ने कहा कि भीड़तंत्र की इजाजत नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को अपने निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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